Chandrayan 3 - चंद्रयान 3 की पूरी जानकारी हिंदी में
Chandrayan 3: Launch and Landing Date - चंद्रयान 3 की पूरी जानकारी हिंदी में , "भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन" यानी "ISRO" द्वारा भेजा गया तीसरा चन्द्र अभियान है, जिनको चंद्रयान 1 और चंद्रयान 2 के बाद भेजा गया है।
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चंद्रयान 1, 2008 में प्रक्षेपित किया गया था, जिसमे केवल ऑर्बिटर ही था। चंद्रयान 2 जो 22 जुलाई 2019 में छोड़ा गया था, उसमे ऑर्बिटर, लेंडर और रोवर था। इस अभियान में ऑर्बिटर अपने कार्य में सफल हो गया था, लेकिन लेंडर और रोवर चांद की सतह पर उतरते हुए सतह से जा कर टकरा गए थे, और उनसे संपर्क टूट गया था। Chandrayan 3: Launch and Landing Date - चंद्रयान 3 की पूरी जानकारी हिंदी में
चंद्रयान 3 में केवल लेंडर* (Lander) और रोवर* (Rover) ही है, इसमें चंद्रयान 2 की तरह ऑर्बिटर* (Orbiter) नहीं है। पिछली बार चंद्रयान 2 में ये तीनों ही शामिल थे। इसका बजट केवल 615 करोड़ है, जो दुनिया के अन्य देशो के चद्र मिशन से बेहद ही कम है।
- ऑर्बिटर* - वो यान जो अंतरिक्ष में चांद के चारो तरफ परिक्रमा करता है, जैसे पृथ्वी पर सभी सैटलाइट करते है।
- लैंडर*- वो हिस्सा जो चांद पर सीधे ही नीचे उतरता है और उसके अंदर Rover सुरक्षित रहता है।
- रोवर*- यह चांद की सतह पर उतरने वाला यान है, जो वहां रह कर कई सारे परीक्षण करेगा। ये अपने पहियो पर चलने में सक्षम है।
Table of Contents
1. Chandrayan 3 - चंद्रयान 3 का प्रक्षेपण और चरण-
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| Image Credit: ISRO |
Chandrayan 3 - चंद्रयान 3 का प्रक्षेपण 14 जुलाई 2023 को दोपहर के 02 बजकर 35 मिनिट और 19 सेकंड पर आंध्र प्रदेश के "श्री हरिकोटा" से हुआ और 969.42 सेकंड की अपनी उड़ान के बाद अपनी कक्षा में स्थापित हुआ। यहां से अब ये अलग अलग 5 कक्षाओं में से होता हुआ, पृथ्वी की कक्षा को छोड़ देगा और चांद के रास्ते पर आगे बढ़ेगा और चांद की कक्षा में पहुंच कर वहां भी एक-एक कक्षा कम करते हुए 5 कक्षाओं में चक्कर लगाएगा और यहां अंतिम निचली कक्षा जो चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर उपर होगी, वहा से "प्रोपल्शन मॉड्यूल" से "लेंडर" अलग होकर चांद पर उतरेगा।
2. कब पहुंचेगा और कहा पहुंचेगा -
Chandrayan 3 - चंद्रयान 3, 24-25 अगस्त तक चांद पर उतरेगा। चंद्रयान 3, चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा, जिसकी Landing Site 69.367621 S, 32.348126 E है, जैसे पृथ्वी पर अक्षांश और देशान्तर होते है। ये अपने उतरने की जगह से 4 किमी x 2.4 किमी के वर्गाकार जगह में कहीं भी उतर सकता है। अब तक केवल China, जो कि सिर्फ 44 Degree South में ही उतर सका है, लेकिन जब भारत यहां उतरने में सफल होगा, तब भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन जाएगा।
Chandrayan 3: Launch and Landing Date - चंद्रयान 3 की पूरी जानकारी हिंदी में
3. LVM 3 M4 रॉकेट की संरचना (Structure) -
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| Image Credit: ISRO |
LVM 3 रॉकेट, ISRO का अब तक का सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट है। इसे पहले GSLV के नाम से जाना जाता था। ये 8000 kg तक के सैटलाइट को LEO यानि Low Earth Orbit तक और 4000 kg तक के सैटलाइट को यह GTO तक लेकर जा सकता है। LVM 3 रॉकेट के प्रक्षेपण में मुख्य रूप से 3 स्टेज होते है, जिनमें पहला स्टेज ठोस ईंधन, दूसरे स्टेज में तरल ईंधन और सबसे जरूरी और सबसे मुश्किल तीसरा स्टेज, जो "क्रायोजेनिक" तकनीक पर आधरित होता है। इस इंजन का विकास करने में हमारे कई सारे भारतीय वैज्ञानिकों को कई दशक लग गए। ये प्रक्षेपण LVM 3 रॉकेट का लगातार 7 वां सफल प्रक्षेपण था। इस रॉकेट की लंबाई 43.5 मीटर और वजन 640,000 kg है।
प्रथम चरण (First Stage)
इस रॉकेट में नीचे मुख्य दो S200 बूस्टर लगे होते है, जो रॉकेट के दोनों तरफ होते है। इन बूस्टर का व्यास 3.2 मीटर तथा इसकी लंबाई 25 मीटर है। ये बूस्टर Solid Fuel Base होते है, अर्थात इसमें उपयोग किया जाने वाला Fuel ठोस होता है। यह अपने साथ 207 टन ठोस ईंधन ले जाते है। ये दोनों बूस्टर 127 सेकंड तक जलते है। इसमें फ्यूल के रूप में HTPB का उपयोग किया जाता है।
द्वितीय चरण (Second Stage)
इस रॉकेट के बीच में, नीचे की ओर रॉकेट का दूसरे Stage का तरल इधन से चलने वाले 2, L110 इंजन होते है। यह 4 मीटर व्यास का होता है और 110 टन तरल फ्यूल ले जाने में सक्षम होता है। इसमें तरल ईंधन के रूप में UDMH और N2O4 का उपयोग होता है। यह लगभग 200 सेकंड तक जलता है।
तृतीय चरण (Third Stage)
रॉकेट के तीसरे स्टेज (C25) में क्रायोजेनिक इंजन लगा होता है, जिसका व्यास 4 मीटर और लंबाई 13.5 मीटर होती है। यह 27 टन ईंधन अपने साथ ले जाता है। इस क्रायोजेनिक इंजन में ईंधन के रूप में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का उपयोग होता है, जिन्हें साथ में जलाकर थ्रस्ट पैदा किया जाता है।
- इसमें सबसे उपर की ओर मुख्य हिस्सा होता है, जिसमे पेलोड यानी सैटलाइट या चंद्रयान को रखा जाता है, जो अंतरिक्ष में पहुंचते ही 2 हिस्सों में खुल जाता है और पेलोड बाहर आ जाता है। इसकी लंबाई 5 मीटर है।
4. Chandrayan 3 - चंद्रयान 3 की संरचना (Structure) -
चंद्रयान 3 का पूरा वजन 3900 किलोग्राम है।
इसके मुख्य 3 हिस्से है-
प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module)
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| Image Credit: ISRO |
ये चंद्रयान के नीचे जुड़ा हुआ, एक यान है, जिसका कार्य रॉकेट द्वारा चंद्रयान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के बाद शुरू होता है। ये ही वो हिस्सा है, जो चंद्रयान को पृथ्वी से चांद तक लेकर जाएगा। इसमें छोटे-छोटे इंजन लगे होते है, जो चंद्रयान को उसकी सही स्थिति और सही समय पर पृथ्वी की अगली कक्षा में स्थापित करने के लिए अपने इंजन शुरू करके चंद्रयान को धक्का देता है और फिर वापस इंजन बंद हो जाता है तथा चंद्रयान अगली कक्षा में स्थापित हो जाता है। ऐसे ही चंद्रयान को 4 बार धक्का देगा और 5वी बार मे चंद्रयान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर धकेल देगा। इसी प्रकार से यह चांद पर पहुंच कर अपनी एक-एक कक्षा कम करेगा। इसका वजन 2148 किलोग्राम है। इस पर 1 पेलोड लगा हुआ है। ये 3 से 6 महीने तक चाँद के चक्कर लगाते हुए अपने 1 उपकरण (पेलोड) से परिक्षण करेगा।
लैंडर (Lander)
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| Image Credit: ISRO |
यह चंद्रयान 3 का मुख्य हिस्सा है, जिस पर 4 पेलोड लगे है। इसका मुख्य कार्य रोवर को सुरक्षित चांद की सतह पर उतारना है। इसके नीचे छोटे 4 थ्रस्टर है, जो लेंडर के चांद पर उतरते समय उसकी गति को पूरा कम करके, आराम से Lander की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाएंगे। इसके बाद इसका एक दरवाजा खुलेगा और उसमे से Rover बाहर आएगा। इसका नाम पहले की तरह "विक्रम" ही है, जो हमारे महान वैज्ञानिक, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक (Father of Indian Space Program) डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। इसका वजन "रोवर" सहित 1752 किलोग्राम है।
रोवर (Rover) -
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| Image Credit: ISRO |
यह चंद्रयान-3 का दूसरा हिस्सा है, जो कि Lander से बाहर निकलेगा और चांद की सतह पर चलेगा। इस पर 2 पेलॉड लगे हुए है। इसके कार्य करने की अवधि केवल 14 दिन है, जो की चांद के लिए 1 सौर दिन होता है। इसका नाम "प्रज्ञान" रोवर है। इसके पहियों पर "इसरो" (ISRO) और हमारे राष्ट्रीय प्रतीक "अशोक चिह्न" का Logo बना हुआ है, जिससे जब रोवर चांद की सतह पर चलेगा, तो वहां की मिट्टी पर ये दोनों चिन्ह उभर कर आएंगे और ये हमेशा के लिए वहां "भारत" की छाप छोड़ देंगे। इसका वजन 26 किलोग्राम है।
Chandrayan 3: Launch and Landing Date - चंद्रयान 3 की पूरी जानकारी हिंदी में
5. Chandrayan 3 - चंद्रयान 3 पर लगे उपकरण -
चंद्रयान 3 में 7 अलग-अलग उपकरण या पेलोड है, जो पूरे मिशन को अंजाम देंगे। इनमे से प्रोपल्शन मॉड्यूल पर 1, लेंडर पर 4 और रोवर पर 2 पेलोड है।
1. लैंडर (Lander) पर लगे उपकरण
1. रेडियो एनाटॉमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर (रंभा) - लैंगमुइर जांच (एलपी) - निकट सतह प्लाज्मा के घनत्व और समय के साथ इसके परिवर्तनों को मापने के लिए
2. चंद्रा का सतही थर्मो भौतिक प्रयोग (ChaSTE) - ध्रुवीय क्षेत्र के निकट चंद्र सतह के तापीय गुणों का मापन करना।
3. चंद्र भूकंपीय गतिविधि के लिए उपकरण (आईएलएसए) - लैंडिंग स्थल के आसपास भूकंपीयता को मापने और चंद्र परत और मेंटल की संरचना का चित्रण करने के लिए।
4. लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे (एलआरए) - यह चंद्रमा प्रणाली की गतिशीलता को समझने के लिए एक निष्क्रिय प्रयोग है।
2. रोवर (Rover) पर लगे उपकरण
1. लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) - गुणात्मक और मात्रात्मक तात्विक विश्लेषण और चंद्र-सतह के बारे में हमारी समझ को आगे बढ़ाने के लिए रासायनिक संरचना प्राप्त करना और खनिज संरचना का अनुमान लगाना।
2. अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) चंद्र लैंडिंग स्थल के आसपास चंद्र मिट्टी और चट्टानों की मौलिक संरचना (एमजी, अल, सी, के, सीए, टीआई, फ़े) निर्धारित करने के लिए।
3. प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module) पर लगे उपकरण -
1. रहने योग्य ग्रह पृथ्वी की स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्री (आकार) - परावर्तित प्रकाश में छोटे ग्रहों की भविष्य की खोज हमें विभिन्न प्रकार के एक्सो-ग्रहों की जांच करने की अनुमति देगी जो रहने योग्य (या जीवन की उपस्थिति) के लिए योग्य होंगे।
6. चंद्रयान-3 के उद्देश्य -
- चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और नरम लैंडिंग का प्रदर्शन करना
- रोवर को चंद्रमा पर घूमते हुए प्रदर्शित करना और
- चंद्रमा की संरचना को बेहतर ढंग से समझने और उसके विज्ञान को अभ्यास में लाने के लिए चंद्रमा की सतह पर उपलब्ध रासायनिक और प्राकृतिक तत्वों, मिट्टी, पानी आदि पर वैज्ञानिक प्रयोग करना।
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