Dr. APJ Abdul Kalam Ji की Biography – जीवन परिचय-बचपन-शिक्षा-करियर

Lalit Sharma
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Dr APJ Abdul Kalam Ji की Autobiography – जीवन परिचय-बचपन-शिक्षा-करियर

 

Dr APJ Abdul Kalam Ji की Autobiography – जीवन परिचय-बचपन-शिक्षा-करियर - एपीजे अब्दुल कलाम हमारे देश के महान वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति भी रहे हैं, उन्होंने अपने जीवन में जितनी भी उपलब्धियां हासिल की है, शायद ही कोई दूसरा इतना सब अपने जीवन में प्राप्त कर सकता है। एपीजे अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक होने का साथ-साथ एक महान व्यक्तित्व वाले व्यक्ति और आम लोगों के राष्ट्रपति भी थे। उन्होंने अपना जीवन काफी संघर्षों के बाद उस मुकाम पर पहुंचाया था।

Dr. APJ Abdul Kalam Ji की Biography – जीवन परिचय-बचपन-शिक्षा-करियर

 

 Dr APJ Abdul Kalam ji का बचपन 

Dr APJ Abdul Kalam ji का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम के धनुषकोडी गांव में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था। इनकी माता का नाम असिम्मा उनका पेशा नावों को किराए पर देने का था। Dr APJ Abdul Kalam ji जी के तीन बड़े भाई और एक बड़ी बहन थी। वह कुल मिलाकर पांच भाई बहन थे। उनका बचपन अत्यंत ही गरीबी में बीता था। एपीजे अब्दुल कलाम जी का स्वभाव बचपन से ही काफी शांत, ईमानदार और सभी धर्मों को सम्मान देने वाला था।  

Dr APJ Abdul Kalam ji की आरंभिक शिक्षा रामेश्वरम एलिमेंट्री स्कूल से हुई थी। बचपन में वे अपने विद्यालय में एक औसत विद्यार्थी थे, पढ़ाई में ना इतने अच्छे थे और ना ही बुरे। लेकिन उन्हें गणित के विषय में काफी ज्यादा दिलचस्पी थी। जब एक बार स्कूल के शिक्षक ने सभी बच्चों को पक्षियों के उड़ने के बारे में बताया, कि वह कैसे उड़ते थे, तभी से उनके मन में आसमान तरफ काफी दिलचस्पी जगने लगी और उन्हें उड़ने के प्रति काफी रुचि पैदा हो गई। साथ ही उन्होंने अपना मन बना लिया था, कि उन्हें आगे जाकर इसी विषय में अपना भविष्य बनाना है। अब्दुल कलाम जी गणित के अध्यापक से ट्यूशन लेने के लिए सुबह 4:00 बजे उठकर ट्यूशन लेने जाते थे।

Dr APJ Abdul Kalam ji ने बचपन में अपनी शिक्षा और अपने परिवार के गुजारे के लिए अखबार भी बेचा करते थे। वह रेलवे स्टेशन से अखबारों को लेकर,  घर-घर अखबारों का वितरण भी किया करते थे। उनका अपने जीवन में उनकी इकलौती बहन के पति यानी उनके जीजा का काफी अहम रोल रहा है, उनके जीजा ने उनको आगे पढ़ने और अपना भविष्य बनाने के लिए काफी प्रेरित और मदद की थी, जिससे आगे चलकर वे इतने बड़े व्यक्तित्व वाले इंसान बने।

 

 Dr APJ Abdul Kalam ji की शिक्षा 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की शिक्षा के सफर की शुरुआत सन 1956 में तिरुचेरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से हुई। जहां उन्होंने भौतिक विज्ञान में बीएससी (B.Sc.) की डिग्री प्राप्त की। तिरुचेरापल्ली से बीएससी (B.Sc.) की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1955 में वह मद्रास चले गए। जहां पर उन्होंने 1954-57 में मद्रास इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।

Dr. APJ Abdul Kalam Ji की Biography – जीवन परिचय-बचपन-शिक्षा-करियर

यहीं से उनके महान वैज्ञानिक बनने के सफर की शुरुआत हुई थी। लेकिन बचपन से उनका सपना लड़ाकू पायलट बनने का था। लड़ाकू विमान का पायलट बनने के लिए उनको नौवां  स्थान प्राप्त हुआ, जबकि इंडियन एयर फोर्स ने आठवें स्थान तक के परिणाम घोषित किए और केवल उन आठ को पायलट बनने के लिए चुना और Dr. APJ Abdul Kalam ji इस परीक्षा में सफल न होकर एक स्थान से पायलट बनने से चूक गए और यही से उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में जाने का फैसला किया।

 

 Dr APJ Abdul Kalam ji का करियर 

अब्दुल कलाम जी के करियर की बात की जाए, तो उन्होंने अपने जीवन में इतनी सारी वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल की है, कि उनके बारे में जितनी बात की जाए वह भी कम है। उन्होंने अपने जीवन के एक लंबे समय को भारत की रक्षा और अंतरिक्ष जरूरत को पूरा करने के लिए न्योछावर कर दिया। उन्होंने देश के लिए अंतरिक्ष, रक्षा और परमाणु तीनों प्रकार के क्षेत्र में काम किया और काफी उपलब्धियां हासिल की। राष्ट्रपति बनने से कुछ पूर्व तक भी वह भारत के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा थे।

सन् 1957 में मद्रास इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी एमआईटी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद 1958 में Dr APJ Abdul Kalam ji डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी DRDO में शामिल हो गए। जहां उन्होंने तकनीकी केंद्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्य करने लगे और यहां पर इन्होंने होवरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप बनाने की टीम का नेतृत्व किया था।

सन 1962 में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी DRDO को छोड़कर के इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी ISRO में आ गए थे। उन्होंने ISRO के संस्थापक डॉ विक्रम साराभाई के नेतृत्व में ISRO में अपना काम शुरू किया। विक्रम साराभाई का इनके जीवन पर काफी गहरा प्रभाव रहा और उन्ही की देखरेख में इन्होंने ISRO में काफी प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। धीरे-धीरे ISRO में काम करते हुए, इनका कद ओर बड़ा होता गया और साल 1969 में डॉक्टर अब्दुल कलाम जी एसएलवी 3 (SLV 3) यानी स्मॉल सैटेलाइट व्हीकल के प्रोजेक्ट हेड बने और यह रॉकेट हमारे देश का प्रथम डिजाइन किया हुआ रॉकेट था। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने SLV 3 के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई थी।

1980 में डॉक्टर Dr. APJ Abdul Kalam ji के नेतृत्व में ही इसी SLV 3 रॉकेट की मदद से भारत का प्रथम खुद के द्वारा विकसित किए गए रॉकेट से “रोहिणी” नामक उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया और इसी तरह भारत भी दुनिया के उन चंद देशों में शामिल हो गया, जो अपने उपग्रह खुद लॉन्च करके पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने ISRO में अपनी कई सारी सेवाएं दी। 1982 में एक बार फिर से DRDO यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन चले गए।

DRDO में उन्होंने काफी सारी टारगेट गाइडेड मिसाइल के ऊपर काम किया, जिसमें अग्नि और पृथ्वी प्रमुख है। Dr. APJ Abdul Kalam ji ने अग्नि और पृथ्वी मिसाइल को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया था। इसी तरह डॉक्टर Dr. APJ Abdul Kalam ji को “मिसाइल मैन” कहा जाता है। एपीजे अब्दुल कलाम जी के नेत्रत्व मे अग्नि मिसाइल को 1989 में लॉन्च किया गया। 


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 Dr APJ Abdul Kalam ji का राष्ट्रपति बनने का सफर 

Dr. APJ Abdul Kalam ji सन 1992 से 1999 तक रक्षा मंत्रालय में रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार एवं सुरक्षा शोध एवं विकास विभाग के सचिव भी थे। सन 1997 से 1999 तक डॉक्टर कलाम सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में भी नियुक्त हुए। सन 2002 में अब्दुल कलाम जी को अटल बिहारी वाजपेई जी और भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित एनडीए ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया।

Dr. APJ Abdul Kalam ji को सभी दलों ने अपना समर्थन दिया और 25 जुलाई 2002 को संसद भवन में राष्ट्रपति पद के शपथ ली। इस दौरान भी उनका स्वभाव काफी शांत और सभी से मिलनसार रहा, जिसमें उनको जनता के राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता है। उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। राष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद में देश के कई सारे अलग-अलग संस्थानों में कुलपति और प्रोफेसर बनाए गए।

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Dr APJ Abdul Kalam Ji को भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु, भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर आदि में विजिटिंग प्रोफेसर, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान तिरुवंतपुरम में कुलपति, अन्ना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और भारत के कई अन्य शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में कई पदों पर काम किया। साथ ही उन्हें देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में उनके भाषणों के लिए बुलाया जाता।


 Dr APJ Abdul Kalam ji के पुरस्कार और किताबे 

 

 Dr APJ Abdul Kalam ji की किताबे 

  • Wings of fire
  • इगनाइटेड माइंड
  • मिशन इंडिया
  • माय जर्नी
  • Manifesto for change
  • India 20-20 vision for the new millennium
  • इंस्पायरिंग थॉट
  • Advantage India


 Dr. APJ Abdul Kalam ji को मिले पुरस्कार 

Dr. APJ Abdul Kalam ji को उनके जीवन में कई सारे पुरस्कार मिले हैं। सन 1981 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया, सन 1990 में पद्म विभूषण और सन 1997 में भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न द्वारा नवाजा गया।

सन 1998 में भारत सरकार द्वारा वीर सावरकर पुरस्कार, सन 2000 में अल्वारेस शोध संस्थान चेन्नई द्वारा रामानुजन पुरस्कार, सन 2008 में नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय सिंगापुर द्वारा डॉक्टर आफ इंजीनियरिंग सम्मान, सन 2009 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी द्वारा वॉन कॉम विंग्स इंटरनेशनल अवार्ड, सन 2009 में एमएसएमई फाउंडेशन द्वारा हुवर मेडल, सन 2009 में ही ओकलैंड विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट, सन 2010 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू द्वारा डॉक्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग, सन 2012 में साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर ऑफ लॉज मानक उपाधि आदि कई पुरस्कार उन्होंने अपने जीवन में प्राप्त किया।

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 APJ Abdul Kalam ji का निधन 

Dr. APJ Abdul Kalam ji 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग यानी भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक भाषण दे रहे थे, तभी उन्हें एक जोरदार दिल का दौरा आया और वही वह बेहोश होकर गिर पड़े और शाम को उन्हें बेथानी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और 2 घंटे बाद उनकी मृत्यु की पुष्टि हो गई। जब Dr. APJ Abdul Kalam ji का निधन हुआ, तब वह 84 साल के थे। 

इस खबर के बाद भारत सरकार ने 7 दिन का राजकीय शोक का ऐलान किया और 28 जुलाई यानी अगले दिन को उनके पार्थिव शरीर को गुवाहाटी से दिल्ली लाया गया। जहां उनके घर में उनके पार्थिव शरीर को आम जनता के दर्शन के लिए रखा गया। यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेताओं ने आकर उनके पार्थिव शरीर के दर्शन किए। 29 जुलाई की सुबह को वायुसेना के विमान के द्वारा भारतीय ध्वज में लिपटे कलाम जी के शरीर को मदुरई भेजा गया। वहां से सेना के ट्रक में उन्हें, उनके ग्रह नगर रामेश्वरम भेजा गया। रामेश्वरम के बस स्टैंड के सामने एक खुले क्षेत्र में उनके पार्थिव शरीर को रखा गया, ताकि जनता उन्हें आखिरी बार श्रद्धांजलि दे सके और उन्हें देख सके।

अगले दिन 30  जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति Dr. APJ Abdul Kalam ji को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के करुंबु ग्राउंड में दफना दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी, तमिलनाडु के राज्यपाल, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रीयो ने भी अंतिम संस्कार में भाग लिया।


Dr. APJ Abdul Kalam ji के जितनी  भी तारीफ की जाए उतनी कम है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना किया और उन्हें पार करके देश के सर्वोच्च पद पर भी विराजमान हुए।  उनका बचपन काफी ग़रीबी और बेसहाय में बीता। उन्होंने अखबार बेचने से लगाकर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास से डिप्लोमा लेकर वैज्ञानिक बनने तक और डीआरडीओ में काम करने से लेकर इसरो में रहकर भारत के प्रथम अंतरिक्ष व्हीकल का प्रक्षेपण करने और वापस DRDO में आकर के गाइडेड मिसाइल, पृथ्वी और अग्नि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने तक का लंबा सफर तय किया। वह एक ऐसे व्यक्ति रहे, जिनकी बदौलत ही हमारे देश में आज हम स्पेस का क्षेत्र में इतने आगे पहुचे और साथ ही हमें अग्नि और पृथ्वी जैसी गाइडेड मिसाइल भी मिली। उन्ही की बदौलत हमारा परमाणु कार्यक्रम सफल हो सका और आज हम दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की सूची में है।

डॉक्टर अब्दुल कलाम जी श्रीमद् भागवत गीता और कुरान दोनों का अध्ययन करते हैं और दोनों का सम्मान करते थे। उनका सपना था, कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जाए। अब्दुल कलाम जी के जीवन से हमेशा ही युवा प्रेरणा लेते रहे हैं और लेते रहेंगे। उनके असाधारण जीवन जीने की कल्पना कोई साधारण व्यक्ति कर भी नहीं सकता। उनके निधन से देश को बहुत बड़ी वैज्ञानिक क्षति पहुंची है।

 

 FAQ 

Q. Dr. APJ Abdul Kalam ji का पूरा नाम क्या है?
Ans. Dr. APJ Abdul Kalam ji का पूरा नाम डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम था।

Q. Dr. APJ Abdul Kalam ji का जन्म और मृत्यु कब हुई?
Ans. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को और निधन 27 जुलाई 2015 को कार्डियक अटैक के कारण हुआ


Q. Dr. APJ Abdul Kalam ji राष्ट्रपति कब बने?
Ans.  Dr. APJ Abdul Kalam ji 25 जुलाई 2002 राष्ट्रपति बने

 

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